Archive for the 'Hindi Shayari' Category

Mai Ek Naari Hun

Saturday, November 10th, 2018

मैं एक नारी हुँ प्रेम चाहती हूँ और कुछ नही….. मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँ हर मुश्किल से खुद को उबार लेती हूँ नहीं मिलता वक्त घर गृहस्थी में फिर भी अपने लिए वक्त निकाल लेती हूँ टूटी होती हूँ अन्दर से कई बार मैं पर सबकी खुशी के लिए मुस्कुरा लेती […]

Gaon aur Sehar Shayari

Monday, October 22nd, 2018

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है // *ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है // तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है // *थक* गया है हर *शख़्स* काम करते करते // तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है। *गांव* चलो *वक्त ही […]

Kaisa hai ye Purush Samaj

Wednesday, November 15th, 2017

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है। पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल भरी है। पेट की अंतड़ियां दर्द से खिंची हुई हैं। इस दर्द से उठती रूलाई जबड़ों की सख़्ती में भिंची हुई है। कल जब मैं उस दुकान में

Dagmagaye se hain aaj Kadam

Thursday, June 8th, 2017

डगमाये से है कदम क्यू ना … आज रंगीनियत की शाम लिख दूं पाकेट में है रकम बेहिसाब सोचता हूँ किस्मत ..क्यू ना उस बेवफा के नाम लिख दु … इल्ज़ामात है हम पर बहुत खामोशियों के .. क्यू ना गुजरता हुआ एक सलाम उसके नाम कर दूं। ब्या करती है कुछ दर्द उस घर […]

Bachpan par Hindi me Kavita

Thursday, June 8th, 2017

टेढ़े मेढ़े रास्तों से चल … पके आम खेतो से चुरा लाते है रखवाली करती उस बुढिया की प्यारी सी गालियाँ ,चल फिर आज सुन आते है। पतंगो में नाम लिख अब तेरा मेरा आसमा की सैर चल आज कर आते है ज़ेब खर्ची के चारआने से दूरदर्शन वाले चित्रहार के गानो पे पिपरमेंट की […]

Bete bhi Ghar Chod ke Jate Hain

Monday, April 10th, 2017

बेटे भी घर छोड़ के जाते हैं.. अपनी जान से ज़्यादा..प्यारा लेपटाॅप छोड़ कर… अलमारी के ऊपर रखा…धूल खाता गिटार छोड़ कर… जिम के सारे लोहे-बट्टे…और बाकी सारी मशीने… मेज़ पर बेतरतीब पड़ी…वर्कशीट, किताबें, काॅपियाँ… सारे यूँ ही छोड़ जाते है…बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!! अपनी मन पसन्द ब्रान्डेड…जीन्स और टीशर्ट लटका… अलमारी में […]

Bacpan ke Dosto ki Yaad Dilati Sunder Kavita

Tuesday, March 28th, 2017

साथ साथ जो खेले थे बचपन में वो सब दोस्त अब थकने लगे है किसीका पेट निकल आया है किसीके बाल पकने लगे है सब पर भारी ज़िम्मेदारी है सबको छोटी मोटी कोई बीमारी है दिनभर जो भागते दौड़ते थे वो अब चलते चलते भी रुकने लगे है उफ़ क्या क़यामत हैं सब दोस्त थकने […]

Dard or Uspar Meri Shayari

Sunday, March 5th, 2017

पीर जब बेहिसाब होती है शायरी लाजवाब होती है इक न इक दिन तो ऐसा आता है शक्ल हर बेनकाब होती है चांदनी जिसको हम समझते हैं गर्मी-ए-आफ़ताब होती है शायरी तो करम है मालिक का शायरी खुद किताब होती है

Mere Sehar me Insan Bahut Hain

Monday, February 20th, 2017

*खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं । *जिसे भी देखो परेशान बहुत है ।। *करीब से देखा तो निकला रेत का घर । *मगर दूर से इसकी शान बहुत है ।। *कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं । *मगर आज झूठ की पहचान बहुत है ।। *मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी । […]

Excellent Heart Touching Poem by Gulzar

Sunday, February 19th, 2017

Excellent poem by gulzar …touched heart …. ऐ उम्र ! कुछ कहा मैंने, पर शायद तूने सुना नहीँ.. तू छीन सकती है बचपन मेरा, पर बचपना नहीं..!! हर बात का कोई जवाब नही होता हर इश्क का नाम खराब नही होता… यु तो झूम लेते है नशेमें पीनेवाले मगर हर नशे का नाम शराब नही […]