Bachpan par Hindi me Kavita

June 8th, 2017

टेढ़े मेढ़े रास्तों से चल …
पके आम खेतो से चुरा लाते है
रखवाली करती उस बुढिया की
प्यारी सी गालियाँ ,चल फिर आज सुन आते है।
पतंगो में नाम लिख अब तेरा मेरा
आसमा की सैर चल आज कर आते है
ज़ेब खर्ची के चारआने से
दूरदर्शन वाले चित्रहार के गानो पे
पिपरमेंट की शर्त
चल आज फ़िर लगाते है Read the rest of this entry »

 

Teri Meri Pyar Wali Mohabbat

May 19th, 2017

मेरी फिक्र में खुद को भूल जाती हो
और बेखबर हो मुझ को ये जताती हो।

होने लगती हो जिस पल दूर मुझसे
कसम से उस पल बहुत याद आती हो।

चाहती हो कितना, पूछू जब कभी तो
आँखों ही आँखों में सब कुछ बताती हो।

मोहब्बत में मेरी खुद को भुलाए बैठी हो
और दिल में अपने जज़्बात छुपाती हो॥

 

Mai Ishq E Mohabbat chahta hun

May 17th, 2017

तेरे इश्क़ की इंतिहा…

तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ;
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ;

सितम हो कि हो वादा-ए-बेहिजाबी;
कोई बात सब्र-आज़मा चाहता हूँ;

ये जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को;
कि मैं आप का सामना चाहता हूँ;

कोई दम का मेहमाँ हूँ ऐ अहल-ए-महफ़िल;
चिराग़-ए-सहर हूँ, बुझा चाहता हूँ;

भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी;
बड़ा बे-अदब हूँ, सज़ा चाहता हूँ।

 

Tum Sitam Bemishal Karte Ho

May 16th, 2017

दुःख देकर सवाल…

दुःख देकर सवाल करते हो;
तुम भी जानम! कमाल करते हो;

देख कर पूछ लिया हाल मेरा;
चलो कुछ तो ख्याल करते हो;

शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी;
ये भी मुझसे सवाल करते हो;

मरना चाहें तो मर नहीं सकते;
तुम भी जीना मुहाल करते हो;

अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को;
हर सितम बे-मिसाल करते हो।

 

Ghazal on Kon Apna Kon Praya

May 15th, 2017

जो ख्याल थे, न कयास थे…

जो ख्याल थे, न कयास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;
जो मोहब्बतों की आस थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

जिन्हें मानता नहीं ये दिल, वो ही लोग मेरे हैं हमसफ़र;
मुझे हर तरह से जो रास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

मुझे लम्हा भर की रफ़ाक़तों के सराब बहुत सतायेंगे;
मेरी उम्र भर की प्यास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

ये जो जाल सारे है आरजी, ये गुलाब सारे है कागजी;
गुल-ए-आरजू की जो बास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

मेरी धडकनों के करीब थे, मेरी चाह थे, मेरा ख्वाब थे;
वो जो रोज़-ओ-शब मेरे पास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए।

 

Lovely Shayari for MAA

May 15th, 2017

माँ‬ के लिए क्या ‪शेर‬ लिखूं,
माँ ने ‪#‎मुझे‬ खुद शेर बनाया‬ है !
“-”

माँ के अहसान की तादाद अगर कोई पूछे तो,
उस से कह दो के बरसात के कतरे गिन ले.!!
“-”

हर लम्हा मेरी धड़कन में धड़कती हो माँ तुम ,
मेरी नज़र में प्यार का कोई एक दिन नहीं होता
“-”

ठोकर लगती है जुबा पे तेरा नाम आता है माँ,
दर्द कम होता है और हौसला बढ़ जाता है माँ..
“-”

Wo lamha jab kisi ne MAA pukara muze…
Ek pal me main shakh se ghana darakht ho gayi…
- Humaira rehman

 

Maa Par Dil Chune Wali Shayari

May 15th, 2017

कमा के इतनी दोलत भी मैं अपनी ‪‎माँ‬ को दे ना पाया,
कि जितने सिक्कों से #माँ मेरी नज़र उतारा करती थी..!!

“-”

जिस बेटे के पहली बार बोलने पर खुशी से चिल्ला उठी थी जो ‪#‎माँ‬,
आज उसी बेटे की एक आवाज पर खामोश हो जाती है….#माँ

“-”

माँ एक ऐसा शब्द हैं, जिसे सिर्फ़ बोलने से ही अपने हृदय में प्यार और ख़ुशी की लहर आ जाती हैं…और ऐसे पावन दिवस पर हर माँ को मेरा प्रणाम..

 

2 Line Hindi Shayari Collection on Mothers Day

May 15th, 2017

*Mother’s Day* पर मुनव्वर राना साब के बहुत ही सुंदर अशआर लिख रहा हूँ ।

इस ग्रुप की सभी माँ को अभिवादन के साथ समर्पित।

 

Vo Log Mujhse Bichad Gaye

May 14th, 2017

जो ख्याल थे, न कयास थे…

जो ख्याल थे, न कयास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;
जो मोहब्बतों की आस थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

जिन्हें मानता नहीं ये दिल, वो ही लोग मेरे हैं हमसफ़र;
मुझे हर तरह से जो रास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

मुझे लम्हा भर की रफ़ाक़तों के सराब बहुत सतायेंगे;
मेरी उम्र भर की प्यास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

ये जो जाल सारे है आरजी, ये गुलाब सारे है कागजी;
गुल-ए-आरजू की जो बास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए;

मेरी धडकनों के करीब थे, मेरी चाह थे, मेरा ख्वाब थे;
वो जो रोज़-ओ-शब मेरे पास थे, वो ही लोग मुझसे बिछड़ गए।

 

Jhuthi Bulandiyon ka Duan

May 13th, 2017

झूठी बुलंदियों का धुँआ​…​

​झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आ​;​​
​क़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आ;​
​​​
इस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियाँ​;
​लेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आ;​
​​
​​​कुछ दूर मैं भी दोशे-हवा पर सफर करूँ​;
​कुछ दूर तू भी खाक की.. सुरत बिखर के आ​;​

​मैं धूल में अटा हूँ मगर तुझको क्या हुआ;​​
आईना देख जा ज़रा घर जा सँवर के आ;
​​
सोने का रथ फ़क़ीर के घर तक न आयेगा;​​​
कुछ माँगना है हमसे तो पैदल उतर के आ​।