Kafi Hai Sirf Insan Hona

*_जरुरी नहीं है फरिश्ता होना_* ,
*_इंसा का काफी है इंसा होना_* ||

_हकीकत ज़माने को अब रास नहीं आती_,
*_एक गुनाह सा हो गया है आईना होना_ ||

*_बाद में तो कारवां बनते जाते है_,
*_बहुत मुश्किल है लेकिन पहला होना_ ||

*_हवाओं के थपेड़े झेलने पड़ते है ऊंचाई पे_,
*_तुम खेल समझ रहे हो परिंदा होना_ ||

*_ये लोग जीते जी मरे जा रहे हैं_,
*_मैं चाहता हूँ मौत से पहले जिंदा होना_ ||

*_अपनी गलतियों पे भी नजरे झुकती नहीं अब_,
*_लोग भूलने लगे हैं शर्मिंदा होना_ ||

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One Response to “Kafi Hai Sirf Insan Hona”

  1. Mosin SM 09989378288 Says:

    Waqt Hame Chup Rehna Sikha Diya ,, Aur Halato Ne Sab Kuch Sehna Sikha Diya ,, Ab Kisiki Aas Nahi Zindgi Me ,, In Tanhaio Ne Ab Hame Aakela Rehna Sikha Diya ,, SM

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